कैसे भुलाऊँ तुझे ?
भूल चुका हूँ तुझे कविता कैसे बनाऊं
जिसमें तेरा नाम न हो वो शब्द कहाँ से लाऊँ
असमंजस की स्थिति है अब बात दिल की कैसे कह पाऊँ
सपनौं मैं तू आती है , चैन से कैसे रह पाऊँ
हर पल तुझे भूलता जाता हूँ
हर उस पल, मैं ज़िन्दगी से दूर जाता हूँ
भूलते - भूलते तुझे भूलना है ये भूल जाता हूँ
केवल उस क्षण को मैं जी पाता हूँ
चली गयी हो दिल से , दिमाग से भी चली जाओगी
अगले कुछ दिनों मे कोशिश करूँगा जुबान से भी चली जाओं
जाओ खुश रहना सदा ये ही दुआ करूंगा सदा
तुझे भूलने की कोशिश दिन रात करूँगा सदा
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